बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने रविवार को एक विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार के उस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। भासा ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, तो उसे पहले संघ और चिकित्सकों की संयुक्त कमेटी से बातचीत करनी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भासा का कहना है कि निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगाने से पहले चिकित्सकों को विकल्प (च्वाइस) दिया जाना जरूरी है। जो डॉक्टर निजी प्रैक्टिस छोड़कर केवल सरकारी सेवा में रहना चाहते हैं, उन्हें नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (NPA) दिया जाए। संघ ने जोर देते हुए कहा कि बिना विकल्प और सहमति के कोई भी निर्णय चिकित्सकों के हित में नहीं होगा।
संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि राज्य में पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी है और ऐसे में एकतरफा फैसले से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। भासा ने यह भी कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि निजी प्रैक्टिस कई चिकित्सकों के लिए आर्थिक मजबूरी भी है, इसलिए समाधान संवाद और सहमति से ही निकल सकता है।
भासा ने सरकार से अपील की है कि वह जल्द से जल्द चिकित्सक संगठनों के साथ बैठक कर व्यावहारिक और संतुलित निर्णय ले, ताकि मरीजों की सेवा और डॉक्टरों के हित—दोनों सुरक्षित रह सकें।
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