वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार की मौजूदा जलवायु केसर की पारंपरिक खेती के लिए अनुकूल नहीं है। केसर की फसल के लिए ठंडा व शुष्क मौसम, नियंत्रित तापमान और विशेष मिट्टी की आवश्यकता होती है, जो सामान्य रूप से बिहार के प्राकृतिक वातावरण में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खुले खेतों में केसर की खेती एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियंत्रित तापमान, नमी और संरक्षित वातावरण में केसर की खेती संभव है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है। विशेष रूप से इन-विट्रो तकनीक से तैयार किए गए स्वस्थ पौधों का उपयोग कर बेहतर परिणाम मिलने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन-विट्रो विधि से तैयार पौधों को पॉलीहाउस, नेट हाउस और आधुनिक उद्यानों में उगाया जा सकता है, जहां तापमान, नमी और प्रकाश को नियंत्रित किया जा सके। इससे न सिर्फ केसर उत्पादन संभव होगा, बल्कि किसानों को उच्च मूल्य वाली फसल से अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि राज्य में इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण व सरकारी सहयोग मिले, तो भविष्य में बिहार में भी केसर उत्पादन की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
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