दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) मामलों को बिना किसी ठोस कारण के लंबित रखने वाले अंचलाधिकारियों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा है कि इस तरह की लापरवाही को अब गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज में देरी के कारण रैयत सरकारी योजनाओं का लाभ, बैंक ऋण, तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
इस संबंध में विभागीय सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किया है। निर्देश में कहा गया है कि यदि 14 दिनों की अवधि में कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो दाखिल-खारिज का आदेश अनिवार्य रूप से पारित किया जाए।
साथ ही, बिना किसी ठोस आधार के स्वतः आपत्ति दर्ज कर मामले को अनावश्यक रूप से सुनवाई में डालना कदाचार माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं, असामाजिक तत्वों द्वारा की गई फर्जी आपत्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
इस निर्णय से राज्य में भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ने और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद की जा रही है।
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