आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव दही-चूड़ा भोज में शामिल होकर सियासी और पारिवारिक संतुलन साधने की कोशिश करते नजर आए। उनके पहुंचने से यह संदेश देने का प्रयास जरूर हुआ कि परिवार और पार्टी में सब कुछ सामान्य है, लेकिन भोज में राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए।
राजनीतिक गलियारों में यह पहले से माना जा रहा था कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस भोज में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में उनका न आना किसी को चौंकाने वाला नहीं था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भोज में शामिल न होने से कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच आश्चर्य का माहौल बन गया। लोग यह सवाल करते दिखे कि जब लालू प्रसाद स्वयं पहुंचे, तो राबड़ी देवी का न आना आखिर किस ओर इशारा करता है।
बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने भी इस पूरे कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। इससे पहले से चल रही पारिवारिक और राजनीतिक खींचतान की चर्चाओं को और बल मिला है। पार्टी के अंदरखाने इसे सिर्फ संयोग बताया जा रहा है, लेकिन सियासी विश्लेषक इसे राजद के भीतर जारी असहजता से जोड़कर देख रहे हैं।
दही-चूड़ा भोज, जो कभी राजद की एकजुटता और ताकत का प्रतीक माना जाता था, इस बार नेताओं की गैरहाजिरी के कारण ज्यादा चर्चाओं में रहा। आने वाले दिनों में इन घटनाक्रमों का पार्टी की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सबकी नजर टिकी है।
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