हिंदू धर्म में कलावा (मौली) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे पूजा-पाठ, हवन, व्रत, यज्ञ और शुभ कार्यों के दौरान हाथ में बांधा जाता है। आमतौर पर यह लाल या लाल-पीले रंग का धागा होता है, जिसे भगवान के आशीर्वाद, सुरक्षा कवच और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन अक्सर लोग यह सवाल करते हैं कि कलावा कितने समय तक बांधकर रखना चाहिए (When to remove kalawa) और कब इसे उतारना उचित होता है। कई लोग इसे महीनों甚至 सालों तक बांधे रहते हैं, जबकि शास्त्रों और संतों के अनुसार यह सही तरीका नहीं है।
कलावा कितने दिनों तक पहनना चाहिए?
इसी विषय पर डॉ. शिवम साधक जी महाराज ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @shivamsadhak_ji पर एक वीडियो साझा किया है। वीडियो में उन्होंने बताया कि—
- कलावा अनंत काल के लिए नहीं होता
- इसे सामान्यतः 21 दिन या 40 दिन तक ही पहनना चाहिए
- कुछ विशेष पूजा या व्रत में यह अवधि पूजा पूर्ण होने तक मानी जाती है
उनके अनुसार, जब पूजा का संकल्प पूरा हो जाए या कलावा ढीला, गंदा या टूटने लगे, तो उसे उतार देना चाहिए।
कलावा उतारने का सही तरीका
कलावा उतारते समय भी सावधानी जरूरी है।
- इसे फेंकना नहीं चाहिए
- बेहतर है कि इसे पीपल के पेड़ के नीचे, जल में प्रवाहित कर दें या किसी पवित्र स्थान पर रख दें
- उतारते समय मन में भगवान का स्मरण करें और आभार व्यक्त करें
कलावा का आध्यात्मिक महत्व (Kalawa spiritual significance)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
- कलावा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है
- यह मन, शरीर और आत्मा को संतुलित रखता है
- पूजा के समय बंधा कलावा व्यक्ति को उसके संकल्प की याद दिलाता है
डॉ. शिवम साधक जी महाराज के अनुसार, समय से अधिक कलावा पहनना उसकी ऊर्जा को निष्क्रिय कर देता है, इसलिए इसे निर्धारित समय पर उतारना ही शुभ माना गया है।
निष्कर्ष
कलावा केवल एक धागा नहीं, बल्कि आस्था और ऊर्जा का प्रतीक है। लेकिन हर धार्मिक वस्तु की तरह इसके भी नियम और मर्यादा हैं। सही समय पर कलावा बांधना और सही समय पर उतारना—दोनों ही उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
धर्म, ज्योतिष और आस्था से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए पढ़ते रहिए
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