अररिया/दरभंगा।
पूर्वोत्तर भारत से दिल्ली के लिए अररिया, फारबिसगंज और दरभंगा मार्ग से राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के परिचालन की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। सीमांचल क्षेत्र के रेल यात्री संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक वर्ग और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस संबंध में लगातार आवाज उठाई जा रही है। लोगों का कहना है कि इस रूट से राजधानी एक्सप्रेस का संचालन न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि पूरे सीमांचल क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा देगा।
यात्री संगठनों के अनुसार वर्तमान में डिब्रूगढ़ से गुवाहाटी होते हुए कटिहार मार्ग से नई दिल्ली के लिए तीन राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो रहा है। ये तीनों ट्रेनें लगभग शत-प्रतिशत क्षमता के साथ चलती हैं। स्थिति यह है कि अग्रिम आरक्षण कराने के बावजूद यात्रियों को अक्सर वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ता है, जिससे सीमांचल और नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों के यात्रियों को भारी परेशानी होती है।
स्थानीय सांसद एवं पूर्व मध्य रेलवे की रेल सलाहकार समिति के प्रतिनिधि दिलेश्वर कामत ने सुझाव दिया है कि इन तीनों में से कम से कम एक राजधानी एक्सप्रेस को सप्ताह में एक दिन अररिया–फारबिसगंज–दरभंगा मार्ग से चलाया जाए। उनका कहना है कि इससे सीमांचल के लाखों यात्रियों को सीधी सुविधा मिलेगी और कटिहार जाने की मजबूरी से निजात मिलेगी।
इंडो-नेपाल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रेल यूजर्स के सदस्य विनोद सरावगी ने कहा कि यदि मौजूदा राजधानी एक्सप्रेस के मार्ग परिवर्तन में तकनीकी अड़चनें हैं, तो डिब्रूगढ़ से नई दिल्ली के बीच एक नई द्विसाप्ताहिक राजधानी एक्सप्रेस चलाई जा सकती है। उन्होंने प्रस्तावित रूट गुवाहाटी, कामाख्या, अलीपुरद्वार, सिलीगुड़ी, ठाकुरगंज, अररिया, फारबिसगंज, दरभंगा और समस्तीपुर होते हुए नई दिल्ली तक सुझाया, जिसे यात्रियों के साथ-साथ रेलवे के लिए भी व्यावहारिक बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल सीमा से सटे जोगबनी, अररिया और फारबिसगंज के यात्रियों को फिलहाल राजधानी एक्सप्रेस पकड़ने के लिए कटिहार जाना पड़ता है, जिससे समय, पैसा और संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी होती है।
बिहार डेली पैसेंजर्स एसोसिएशन के केंद्रीय सदस्य बछराज राखेचा ने कहा कि राजधानी एक्सप्रेस का परिचालन सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं रेल यात्री संघ के सदस्य चंदन भगत ने सुझाव दिया कि ठाकुरगंज–अररिया रेल मार्ग के माध्यम से इस ट्रेन को सीतामढ़ी, गोरखपुर, अयोध्या धाम और लखनऊ जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से जोड़ा जा सकता है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
रेलवे कम्यूटर्स फोरम के सदस्य राकेश रौशन ने वैकल्पिक सुझाव देते हुए कहा कि यदि राजधानी एक्सप्रेस का संचालन संभव न हो, तो इसी रूट पर अत्याधुनिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तकनीकी रूप से उन्नत होने के साथ यात्रियों के लिए अधिक आरामदायक होगी और इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
यात्री संगठनों को उम्मीद है कि आगामी केंद्रीय बजट और संसद सत्र के दौरान संबंधित सांसद इस मांग को मजबूती से उठाएंगे और रेल प्रशासन इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा।
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