नई दिल्ली।
UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद देशभर में इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि संवैधानिक व्यवस्था में सभी वर्गों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा होनी चाहिए। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद खासकर जनरल कैटेगरी से जुड़े संगठनों और लोगों में राहत और जश्न का माहौल देखा जा रहा है। उनका कहना है कि नए नियमों से शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन और भेदभाव की आशंका पैदा हो रही थी, जिस पर अदालत ने समय रहते हस्तक्षेप किया।
हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर कई आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट भी वायरल हो रही थीं। कुछ पोस्ट में यह तक लिखा गया कि लोग शपथ लेकर सिर मुंडवा लेंगे, कुछ ने धर्म परिवर्तन जैसी अतिशयोक्तिपूर्ण बातें कही, वहीं कुछ पोस्ट में यह दावा किया गया कि अब “आजिवन बीजेपी को वोट नहीं दिया जाएगा”। इसके साथ ही 1 फरवरी को ‘भारत बंद’ के आह्वान से जुड़ी पोस्ट भी सोशल मीडिया पर खूब साझा की जा रही थीं।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसी भी मान्यता प्राप्त संगठन या आधिकारिक मंच से भारत बंद को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी। जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई ऐसी पोस्टें समाज में भ्रम और तनाव पैदा करने का काम करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार और UGC अपना पक्ष नहीं रखते, तब तक नए नियमों पर रोक जारी रहेगी। अब सबकी निगाहें 19 मार्च पर टिकी हैं, जब केंद्र सरकार और UGC अदालत में अपना जवाब पेश करेंगे।
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