संवाद
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सनातन को बाँटने वाले बताए जा रहे यूजीसी के विवादित नियम पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गिरिराज सिंह ने अपने बयान में कहा कि सनातन कोई संकीर्ण अवधारणा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जो विविधता में एकता का संदेश देती है। ऐसे किसी भी नियम या व्यवस्था से यदि समाज में विभाजन की आशंका उत्पन्न होती है, तो उस पर पुनर्विचार आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप देश की संवैधानिक और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूती प्रदान करता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की पहचान “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” और सनातन की अखंड एकता से जुड़ी हुई है। सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना है, न कि किसी भी रूप में विभाजन को बढ़ावा देना।
गिरिराज सिंह ने विश्वास जताया कि आगे भी संवैधानिक संस्थाएं देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द की रक्षा में इसी तरह अपनी भूमिका निभाती रहेंगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।
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