बिहार में गाल ब्लैडर कैंसर का बढ़ता खतरा, महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित


पटना।
बिहार के कई जिलों में गाल ब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जानलेवा बीमारी से सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित हो रही हैं। टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सहयोग से किए गए जनसंख्या आधारित सर्वे में इसका खुलासा हुआ है।

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 से 2021 के बीच जिले में कुल 2,165 नए कैंसर मरीज सामने आए, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक रही। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद अब गाल ब्लैडर कैंसर सबसे तेजी से उभरता हुआ कैंसर बनता जा रहा है।

2021-22 में 75 प्रतिशत मरीज महिलाएं

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021-22 के दौरान पित्ताशय कैंसर के 207 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें करीब 75 प्रतिशत मरीज महिलाएं थीं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

देरी से अस्पताल पहुंच रहे मरीज

डॉक्टरों के अनुसार सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अधिकतर मरीज बीमारी के गंभीर चरण में अस्पताल पहुंचते हैं। शुरुआती लक्षणों को सामान्य पेट की परेशानी समझकर लोग अनदेखा कर देते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

विशेषज्ञों ने गाल ब्लैडर कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देने की सलाह दी है—

  • लगातार पेट दर्द
  • अपच या भोजन न पचना
  • पीलिया (आंखों व त्वचा का पीला पड़ना)
  • अचानक वजन घटना

डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच और इलाज होने पर गाल ब्लैडर कैंसर पूरी तरह इलाज योग्य है।

समय पर जांच ही बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महिलाओं, खासकर 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है। साथ ही खान-पान और जीवनशैली में सुधार को भी जरूरी बताया गया है।

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