संवाद
हिंदू पंचांग और भारतीय परंपरा में सप्ताह के प्रत्येक दिन का अपना विशेष धार्मिक, पौराणिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। इन्हीं में से एक है रविवार, जिसे आम बोलचाल में केवल संडे ही नहीं बल्कि कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि रविवार को इतवार, आदित्यवार, अर्कवार और भानुवार भी कहा जाता है। इन सभी नामों का संबंध सूर्य देव से जुड़ा हुआ है।
1. इतवार
“इतवार” शब्द फारसी और उर्दू भाषा के प्रभाव से प्रचलित हुआ। भारत के कई हिस्सों, खासकर उत्तर भारत में आज भी रविवार को इतवार कहा जाता है। यह नाम मुगलकाल और उसके बाद के प्रशासनिक व सामाजिक प्रयोग से आम हुआ।
2. आदित्यवार
संस्कृत में सूर्य देव को आदित्य कहा जाता है। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन माना जाता है, इसलिए इसे आदित्यवार भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्य, तेज और यश की प्राप्ति होती है।
3. अर्कवार
अर्क भी सूर्य का ही एक वैदिक नाम है। वैदिक ग्रंथों और संस्कृत साहित्य में सूर्य को अर्क कहा गया है, जिसका अर्थ है प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत। इसी कारण रविवार को अर्कवार नाम से भी जाना जाता है।
4. भानुवार
सूर्य देव का एक और नाम भानु है, जिसका अर्थ है प्रकाशमान और तेजस्वी। भानुवार नाम सूर्य की उसी तेजस्विता और जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है। यह नाम धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र में अधिक प्रचलित है।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
रविवार को सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है। इस दिन तांबे के लोटे से जल अर्पित करना, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और लाल वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मबल, आत्मविश्वास, सरकारी नौकरी और मान-सम्मान का कारक ग्रह है।
इस प्रकार रविवार के ये सभी नाम — इतवार, आदित्यवार, अर्कवार और भानुवार — सूर्य देव के विभिन्न स्वरूपों और उनके महत्व को दर्शाते हैं। ये नाम न केवल हमारी भाषाई विविधता को दिखाते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और परंपराओं की समृद्धि का भी प्रमाण हैं।
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