संवाद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए के रणनीतिकार जहां बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की जीत को बंपर जीत बताते हुए जनता के अभूतपूर्व समर्थन का दावा कर रहे हैं, वहीं मशहूर फिल्म अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम पार्टी के संस्थापक कमल हासन इस जीत को बिल्कुल अलग नजरिये से देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह जीत पूरी तरह निष्पक्ष नहीं, बल्कि “आधी-अधूरी, अधपकी और सवालों के घेरे में” है।
दरअसल, कमल हासन ने यह बात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कही। उन्होंने अपने भाषण में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे को उठाते हुए इसे इस साल तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़ दिया और गहरी चिंता जताई।
कमल हासन ने कहा कि देश में अब मतदान का अधिकार ही जांच के दायरे में लाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि हम वोट डालना चाहते हैं, लेकिन चुनाव आयोग हमारे वोट देने के अधिकार की जांच कर रहा है। कई लोगों को नाम की वर्तनी, पते और दस्तावेजों को लेकर जांच का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें अक्सर तकनीकी या मानवीय गलतियां होती हैं।
उनका इशारा इस ओर था कि जब बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार पर सवाल खड़े किए जाते हैं या उन्हें प्रक्रियागत अड़चनों में उलझाया जाता है, तो ऐसे में किसी भी चुनावी जीत को पूरी तरह लोकतांत्रिक और निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता। इसी संदर्भ में वे बिहार विधानसभा चुनाव की जीत को भी संदेह की नजर से देख रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में कमल हासन के इस बयान को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों पर गंभीर सवाल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भी दिख सकता है।
देश और राजनीति से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज