यूजीसी नियमों को लेकर नाराज़गी बनी वजह, पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में एनएसयूआई का दबदबा


पटना से रोहित कुमार सोनू की विशेष रिपोर्ट | छात्र राजनीति में बड़ा उलटफेर

🗳️ कैंपस राजनीति की दिशा तय

पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 के नतीजों ने कैंपस की राजनीति की दिशा तय कर दी है। इस बार एबीवीपी की हार की बड़ी वजह यूजीसी से जुड़े नियमों को लेकर उपजा असंतोष माना जा रहा है। देश के कई हिस्सों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए बनाए गए प्रावधानों को सवर्ण समाज और छात्र संगठनों ने ‘एकतरफा’ बताया। इसी मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के छात्र विंग के जरिए सरकार को संदेश देने की कोशिश भी देखने को मिली।

देर रात करीब 1 बजे परिणाम घोषित होते ही आर्ट्स कॉलेज के सामने छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस चुनाव में एनएसयूआई ने केंद्रीय पैनल की तीन सीटों पर जीत दर्ज कर दबदबा कायम किया, जबकि एबीवीपी को दो पदों पर संतोष करना पड़ा। अध्यक्ष पद पर शान्तु शेखर की शानदार जीत को लंबे समय बाद एनएसयूआई की मजबूत वापसी माना जा रहा है।

🎉 देर रात तक जश्न, कैंपस में बढ़ी गहमागहमी

नतीजों के ऐलान के बाद समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ जीत का जश्न मनाया। आर्ट्स कॉलेज परिसर में देर रात तक भीड़ जुटी रही। किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।

🧾 केंद्रीय पैनल में किसे मिली जीत?

  • अध्यक्ष: शान्तु शेखर (एनएसयूआई)
  • महासचिव: खुशी (एनएसयूआई)
  • उपाध्यक्ष: सिफकत फेज़ा (निर्दलीय)
  • संयुक्त सचिव: अभिषेक कुमार (एबीवीपी)
  • कोषाध्यक्ष: हर्षवर्धन (एबीवीपी)

📉 मतदान प्रतिशत घटा, छात्रों की भागीदारी पर सवाल

इस बार कुल मतदान 37.84% रहा, जबकि पिछले चुनाव में यह 45.25% था—यानी करीब 7.41% की गिरावट। परीक्षा-तिथियों का दबाव, हॉस्टल से बाहर रह रहे छात्रों की कम भागीदारी और मौसम को इसकी वजह माना जा रहा है।

⏳ 1980 के बाद फिर बदला ट्रेंड

1980 में छात्र कांग्रेस के अनिल शर्मा के अध्यक्ष बनने के बाद अलग-अलग संगठनों का दबदबा रहा, लेकिन छह चुनावों के बाद एनएसयूआई की वापसी ने कैंपस राजनीति को नई दिशा दी है।

🔎 आगे क्या उम्मीदें?

नवनिर्वाचित अध्यक्ष शान्तु शेखर ने कहा कि प्राथमिकता छात्रावास व्यवस्था सुधारना, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और लाइब्रेरी-इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना होगी। छात्रों को नई टीम से पढ़ाई, सुरक्षा और रोजगारोन्मुखी गतिविधियों पर ठोस पहल की उम्मीद है।

छात्र राजनीति में यह जीत-हार सिर्फ पदों की नहीं, बल्कि कैंपस की भावी दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।

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✍️ रोहित कुमार सोनू



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