नई दिल्ली।
देश की केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से प्रभावी मानी जाएगी, जिसके चलते कर्मचारियों और पेंशनर्स को बीते महीनों का एरियर भी एकमुश्त मिलेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक ज्यादातर लाभार्थियों के बैंक खातों में यह राशि पहुंच चुकी है। 3% की यह बढ़ोतरी बेसिक सैलरी और बेसिक पेंशन पर लागू होगी, जिससे हर महीने की आय में सीधा इजाफा होगा।
बढ़ती महंगाई में कर्मचारियों को राहत
आज के दौर में जब राशन, ईंधन, बिजली-पानी, शिक्षा और इलाज जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, सरकार का यह फैसला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। डीए बढ़ने से न केवल मासिक वेतन बढ़ेगा, बल्कि भविष्य की बचत और आर्थिक स्थिरता भी मजबूत होगी।
पेंशनर्स को भी मिलेगा बराबर लाभ
यह लाभ केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को डीआर के रूप में 3% की बढ़ोतरी बेसिक पेंशन पर दी जाएगी। बढ़ते इलाज और दवाइयों के खर्च के बीच यह अतिरिक्त राशि बुजुर्ग पेंशनर्स को आर्थिक संबल प्रदान करेगी, जिससे वे दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर कम निर्भर रहेंगे।
इतने लोग होंगे लाभान्वित
इस फैसले से करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 65 लाख पेंशनभोगी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आय बढ़ने से बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे व्यापार, उत्पादन और रोजगार को भी गति मिलेगी।
एरियर का मिलेगा एकमुश्त भुगतान
क्योंकि यह बढ़ोतरी जुलाई 2024 से लागू मानी गई है और घोषणा बाद में हुई, इसलिए जुलाई 2024 से घोषणा की तारीख तक का पूरा बकाया एक साथ भुगतान किया जाएगा। यह राशि त्योहारों की खरीदारी, बच्चों की फीस, घर की मरम्मत या किसी आपात स्थिति में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। जिन कर्मचारियों या पेंशनर्स को अब तक बकाया राशि नहीं मिली है, उन्हें अपने संबंधित कार्यालय या बैंक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
AICPI के आधार पर तय होता है डीए/डीआर
डीए और डीआर की गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आधार पर की जाती है। इसकी समीक्षा हर साल जनवरी और जुलाई में होती है, ताकि महंगाई के अनुसार समय-समय पर संशोधन किया जा सके। यह प्रणाली कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक आय को महंगाई के असर से बचाने में अहम भूमिका निभाती है।
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