पटना। खेती-किसानी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में बिहार सरकार का ‘एग्री स्टैक’ अभियान तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 11 फरवरी 2026 तक एग्री स्टैक के तीसरे चरण में 40 लाख से अधिक किसानों ने ‘फार्मर रजिस्ट्री’ के लिए आवेदन कर दिया है।
यह जानकारी बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के माध्यम से साझा की गई है।
सरकार का लक्ष्य खेती को स्मार्ट, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है। इसी क्रम में ‘फार्मर रजिस्ट्री’ को किसानों का डिजिटल पहचान पत्र माना जा रहा है, जिसे आम भाषा में ‘किसान आईडी’ (Farmer ID) कहा जा रहा है।
क्या है फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry)?
फार्मर रजिस्ट्री के तहत हर किसान को एक यूनिक डिजिटल आईडी दी जाएगी। इसके जरिए किसान की जमीन, फसल, बैंक खाते और सरकारी योजनाओं की जानकारी डिजिटल रूप से लिंक हो जाएगी।
किसानों को क्या-क्या फायदे होंगे?
- सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसान तक पहुंचेगा
- सब्सिडी और मुआवजा पाने में पारदर्शिता आएगी
- फसल बीमा और कृषि ऋण में आसानी होगी
- फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी
- किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा
क्यों जरूरी है किसान आईडी?
अब तक कई योजनाओं में लाभ वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं। फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद हर किसान की पहचान डिजिटल तरीके से सत्यापित होगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और असली किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार का अगला लक्ष्य
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में बिहार के सभी पात्र किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ दिया जाए। इसके लिए पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी जा रही है, ताकि ग्रामीण इलाकों के किसानों को भी डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा सके।
खेती के डिजिटलकरण की यह पहल बिहार में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
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