मैट्रिक परीक्षा से पहले ही स्टार बने भारत के दो क्रिकेटर, सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की कहानी


भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, जुनून है। इस जुनून ने कुछ खिलाड़ियों को इतनी कम उम्र में स्टार बना दिया कि पढ़ाई-लिखाई के साथ करियर को संतुलित करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया। भारतीय क्रिकेट इतिहास में अब तक सिर्फ दो ऐसे खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने मैट्रिक (दसवीं) की परीक्षा से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली।

पहला नाम है महाराष्ट्र के महान बल्लेबाज़ Sachin Tendulkar का। साल 1989 में जब सचिन महज 16 साल के थे, उसी दौरान उनका चयन पाकिस्तान दौरे के लिए भारतीय टीम में हो गया। यह उनके करियर का ऐतिहासिक दौरा माना जाता है, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। उसी साल उन्हें मैट्रिक परीक्षा देनी थी, लेकिन देश के लिए खेलने के कारण उनकी परीक्षा छूट गई। बाद में उन्होंने पढ़ाई पूरी की, लेकिन क्रिकेट ने उन्हें इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया कि वह दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट सितारों में शुमार हो गए।

दूसरा नाम है बिहार के उभरते सितारे Vaibhav Suryavanshi का। महज 14 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन कर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद वह अंडर-19 विश्वकप विजेता भारतीय टीम का भी हिस्सा बने, जिससे उनकी लोकप्रियता और भी तेजी से बढ़ी। अब वैभव 17 फरवरी से शुरू हो रही सीबीएसई बोर्ड की मैट्रिक (दसवीं) परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

उनका परीक्षा केंद्र समस्तीपुर स्थित पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल में निर्धारित किया गया है। छोटी उम्र में मिली बड़ी कामयाबी और सेलिब्रिटी स्टेटस को देखते हुए प्रशासन ने परीक्षा केंद्र पर उनके लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है। आम छात्रों की तरह परीक्षा देना जहां एक तरफ उनके लिए जिम्मेदारी का पल है, वहीं दूसरी ओर यह युवाओं के लिए एक संदेश भी है कि खेल और पढ़ाई दोनों में संतुलन बनाना संभव है।

सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की यह कहानी बताती है कि प्रतिभा उम्र नहीं देखती। अगर लगन और मेहनत हो, तो छोटी उम्र में भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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✍️ संपादक: रोहित कुमार सोनू

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