यूपी चुनाव 2027 से पहले सियासी गर्माहट, सपा में पहुंचे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मुस्लिम वोटों की जंग तेज


उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर माहौल गरमाने लगा है। प्रेम के महीने फरवरी में नेताओं का “राजनीतिक प्रेम” भी इधर-उधर पनपता दिख रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस को झटका देते हुए वरिष्ठ नेता Naseemuddin Siddiqui आखिरकार Samajwadi Party के पाले में पहुंच गए हैं।

कुछ दिन पहले तक नसीमुद्दीन सिद्दीकी की Bahujan Samaj Party में “घर वापसी” की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लग गया है। बसपा छोड़ने से पहले जिस तरह से उन्होंने पार्टी प्रमुख Mayawati पर तीखे हमले किए थे, उससे दोनों के बीच सुलह की संभावना लगभग खत्म हो गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पुराने बयानों की वजह से बसपा में वापसी का रास्ता उनके लिए आसान नहीं था।

अब नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने के बाद पश्चिमी यूपी की सियासत में समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं। खास तौर पर मुस्लिम वोट बैंक को लेकर मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है। सपा को इससे मजबूती मिल सकती है, लेकिन दूसरी ओर All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के प्रमुख Asaduddin Owaisi की चुनौती भी बढ़ती नजर आ रही है। ओवैसी पश्चिमी यूपी में लगातार सक्रियता बढ़ा रहे हैं, जिससे मुस्लिम मतदाताओं का बिखराव सपा के लिए नई चिंता बन सकता है।

2027 के चुनाव से पहले नेताओं की अदला-बदली और सियासी खेमेबंदी यह साफ संकेत दे रही है कि यूपी में इस बार मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि वोट बैंक को साधने की रणनीतियों के बीच भी कड़ा होने वाला है। आने वाले महीनों में और बड़े राजनीतिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।

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✍️ संपादक: रोहित कुमार सोनू

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