होली में सांस के मरीज बरतें खास सावधानी, रंग-गुलाल से बिगड़ सकती है तबीयत


होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन दमा, अस्थमा, सीओपीडी (COPD) और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह त्योहार परेशानी बढ़ा सकता है। सूखे रंग और गुलाल हवा में उड़कर सांस की नलियों में जलन पैदा करते हैं, जिससे खांसी, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्या बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार होली के दौरान सांस के मरीजों को भीड़-भाड़ और धूल वाली जगहों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। बाहर निकलते समय N95 जैसे अच्छे मास्क का उपयोग करें ताकि रंग-गुलाल और धूल सीधे फेफड़ों तक न पहुंचे।

सांस के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां

  • सूखे रंग और गुलाल से बचें, गीले व प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दें।
  • भीड़ और धूल-धुएं वाली जगहों से दूरी बनाए रखें।
  • बाहर जाते समय N95 मास्क जरूर पहनें।
  • इनहेलर व जरूरी दवाइयां हमेशा साथ रखें और समय पर लें।
  • शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए खूब पानी पिएं।
  • होली खेलने के बाद नाक और चेहरे को साफ पानी से धो लें।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर होली के दौरान या बाद में खांसी, घरघराहट, सांस फूलना या सीने में जकड़न बढ़ जाए, तो तुरंत आराम करें और बिना देरी किए नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें।

होली खुशियों का पर्व है, लेकिन सेहत पहले है। थोड़ी सी सावधानी आपको त्योहार का आनंद सुरक्षित तरीके से लेने में मदद करेगी।

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