पटना। स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। बच्चों द्वारा ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया पर घंटों समय बिताने का मुद्दा सोमवार को बिहार विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान उठा।
इस मुद्दे को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक समृद्ध वर्मा ने सदन में रखा। उन्होंने कहा कि बच्चों की सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग में बढ़ती दिलचस्पी “एक अदृश्य महामारी” की तरह है, जो बिहार के भविष्य की जड़ों को कमजोर कर रही है। उनके मुताबिक आकर्षक खिलौनों और किताबों की जगह अब लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग ने ले ली है, जिससे बच्चे लगातार बंधे रहते हैं।
विधायक ने यह भी कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को चेतावनी के रूप में उद्धृत किया गया है और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट के रूप में मान्यता दी गई है।
इस पर जवाब देते हुए राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार बच्चों के स्क्रीन टाइम में हो रही वृद्धि और इसके दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के लिए एक समग्र नीति तैयार कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में स्कूलों, अभिभावकों और समाज के सहयोग से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई पर ध्यान, आंखों की रोशनी और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार की प्रस्तावित नीति से इस समस्या पर अंकुश लगने की उम्मीद की जा रही है।
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