बिहार में जमीन से जुड़े धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए बिहार की नीतीश सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। अब राज्य में जमीन के जाली दस्तावेज पेश करने या बनाने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी और दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान किया जा रहा है।
इस फैसले की जानकारी उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े मामलों में फर्जीवाड़ा आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है, इसलिए सरकार अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने जा रही है।
21,90,15,001 रुपये का बजट सर्वसम्मति से पारित
सदन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 21 अरब 90 करोड़ 15 लाख 1 हजार रुपये के बजट को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सरकार का दावा है कि इस बजट का इस्तेमाल भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, दाखिल-खारिज प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने में किया जाएगा।
विपक्ष का वॉकआउट
हालांकि सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप है कि केवल सजा का प्रावधान करने से समस्या खत्म नहीं होगी, जब तक जमीनी स्तर पर रजिस्ट्रेशन कार्यालयों और राजस्व कर्मियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती।
आम लोगों को क्या फायदा?
इस फैसले से जमीन खरीद-फरोख्त करने वाले आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
- फर्जी कागजात पर जमीन हड़पने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी
- पीड़ितों को कानूनी संरक्षण मिलेगा
- जमीन विवाद और कोर्ट केसों में कमी आने की संभावना है
सरकार का कहना है कि जल्द ही इस फैसले को लागू करने के लिए नियमावली जारी की जाएगी, ताकि पूरे राज्य में एक समान कार्रवाई हो सके।