नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा के बीच बिहार की राजनीति नए दौर में, भाजपा बनाम आरजेडी की सीधी लड़ाई संभव


बिहार की राजनीति लंबे समय से समाजवादी विचारधारा और भगवा राजनीति यानी भारतीय जनता पार्टी के बीच संतुलन और टकराव के इर्द-गिर्द घूमती रही है। पिछले दो दशकों में मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अपनी राजनीतिक कुशलता से इस संतुलन को बनाए रखा और राज्य की राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। उनके नेतृत्व में समाजवादी धारा लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में बनी रही।

हालांकि दूसरी ओर Bharatiya Janata Party ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अधिक सीटें हासिल कीं, लेकिन इसके बावजूद बिहार में भाजपा को अपने दम पर सत्ता हासिल करना आसान नहीं रहा। राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना ऐसी रही है कि भाजपा को अक्सर सहयोगी दलों के सहारे ही सरकार बनानी पड़ी।

इसी कारण बिहार लंबे समय तक भाजपा के लिए एक ऐसा राज्य रहा जिसे अकेले जीत पाना मुश्किल माना जाता रहा। लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि अगर Nitish Kumar मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा की राजनीति में जाते हैं, तो बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

नीतीश कुमार के सक्रिय राज्य राजनीति से हटने के बाद भाजपा के लिए राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर पैदा हो सकता है। ऐसे में धीरे-धीरे सत्ता का केंद्र भाजपा के हाथों में जाता हुआ दिखाई दे सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति दो बड़े ध्रुवों में बंट सकती है। एक तरफ Bharatiya Janata Party और उसके सहयोगी होंगे, तो दूसरी ओर Rashtriya Janata Dal और उसका सामाजिक आधार।

इस स्थिति में बिहार की राजनीति में लंबे समय से मौजूद तीसरा संतुलनकारी चेहरा कमजोर पड़ सकता है और मुकाबला सीधे भाजपा बनाम आरजेडी के रूप में देखने को मिल सकता है।

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्या सचमुच बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है या फिर Nitish Kumar की रणनीति एक बार फिर राजनीतिक समीकरणों को बदल देगी।

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रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू | Mithila Hindi News

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