पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समाजवादी धारा के प्रमुख चेहरे और लंबे समय तक नीतीश कुमार के करीबी रहे किशन चंद त्यागी (केसी त्यागी) ने आखिरकार जनता दल यूनाइटेड (जनता दल यूनाइटेड) से इस्तीफा दे दिया है।
केसी त्यागी का यह कदम अचानक नहीं माना जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से उनके बयानों में पार्टी लाइन से अलग रुख साफ दिख रहा था। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर ऐसे विचार रखे, जो जदयू के आधिकारिक स्टैंड से मेल नहीं खाते थे। उसी समय से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं।
राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले नीतीश कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन उनकी यह चुप्पी ही एक मजबूत संदेश मानी जा रही थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश की यही रणनीतिक चुप्पी केसी त्यागी के लिए संकेत बन गई, जिसके बाद उन्होंने खुद ही पार्टी से अलग होने का फैसला ले लिया।
केसी त्यागी, जो समता पार्टी के दौर से ही नीतीश कुमार के साथ रहे और समाजवादी राजनीति की बुनियाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते रहे, अब एक नए राजनीतिक रास्ते की तलाश में हैं। हालांकि उन्होंने यह साफ किया है कि वे सक्रिय राजनीति से दूर नहीं होंगे, बल्कि नए मंच और नए विचारों के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखेंगे।
उनका इस्तीफा जदयू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति में लगातार बदलाव और समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि केसी त्यागी आगे किस राजनीतिक दल या मंच के साथ जुड़ते हैं और बिहार की राजनीति में उनकी अगली भूमिका क्या होगी।
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