प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन कम होना खतरनाक, डॉक्टरों ने दी खास सलाह


गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य का सीधा असर उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. समरा मसूद के अनुसार, प्रेग्नेंसी के किसी भी महीने में महिला का हीमोग्लोबिन 10 g/dL से कम नहीं होना चाहिए।

अगर शरीर में खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है, तो गर्भवती महिला को चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, थकान और सांस फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह स्थिति न सिर्फ मां के लिए बल्कि बच्चे के लिए भी जोखिम भरी हो सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि हीमोग्लोबिन की कमी का असर सीधे बच्चे के विकास पर पड़ता है। इससे शिशु का वजन कम रह सकता है और उसे पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। गंभीर मामलों में समय से पहले डिलीवरी का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है। आहार में आयरन से भरपूर चीजें जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, गुड़, दाल और सूखे मेवे शामिल करने चाहिए। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड की दवाएं भी नियमित रूप से लेनी चाहिए।

स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है, इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच और संतुलित आहार को नजरअंदाज न करें।

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