वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली कालाष्टमी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान शिव के उग्र और रौद्र स्वरूप कालभैरव की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालभैरव की आराधना करने से जीवन के सभी भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
📅 कालाष्टमी 2026 की तिथि
वर्ष 2026 में वैशाख मास की कालाष्टमी 20 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह दिन साधना और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
🛕 पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है:
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर या मंदिर में भगवान शिव और कालभैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाकर धूप, अगरबत्ती अर्पित करें।
- कालभैरव बाबा को काला तिल, सरसों का तेल, नारियल, फूल और मिठाई चढ़ाएं।
- “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- रात्रि में जागरण करना और भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- जरूरतमंदों को भोजन और दान दें।
🌟 कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का व्रत रखने से व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:
- भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है
- जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है
- ग्रह दोष और बाधाएं दूर होती हैं
- आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है
🔱 विशेष मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कालभैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को समय और मृत्यु के भय से भी मुक्ति मिलती है।
वैशाख कालाष्टमी का व्रत और पूजा जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ कालभैरव बाबा की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो सकते हैं।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू