सीतामढ़ी जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। समाहरणालय सीतामढ़ी (जिला विधि प्रकोष्ठ) की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी निजी विद्यालय छात्रों या अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
जिले में बड़ी संख्या में निजी विद्यालय संचालित हैं, जिनमें हजारों छात्र अध्ययनरत हैं। पिछले कुछ समय से अभिभावकों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि स्कूल प्रबंधन द्वारा एडमिशन फीस, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क के अलावा अनावश्यक शुल्क वसूला जा रहा है। साथ ही, किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म केवल तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था।
प्रशासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रथा शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देती है और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है। बिहार निजी विद्यालय (शुल्क) अधिनियम, 2019 के तहत भी इस तरह की बाध्यता पर रोक है।
जिला प्रशासन के प्रमुख निर्देश:
- कोई भी विद्यालय छात्रों को किसी एक निर्धारित दुकान से किताब, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
- सभी निजी विद्यालयों को प्रत्येक कक्षा की पुस्तकों और यूनिफॉर्म की पूरी जानकारी (दरों सहित) 13 अप्रैल 2026 तक अपनी वेबसाइट और स्कूल परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
- विद्यालय प्रशासन यूनिफॉर्म में अनावश्यक बदलाव नहीं करेगा।
अतिरिक्त दिशा-निर्देश भी जारी:
- बच्चों को बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- स्कूल वाहनों में सीसीटीवी, मेडिकल किट जैसे सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होंगे।
- आरटीई (RTE) 2009 के तहत नामांकित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ऋची पांडेय द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि यदि कोई विद्यालय इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व निष्पक्षता को बढ़ावा मिलेगा।