बिहार के कटिहार जिले के फलका प्रखंड के किसानों ने मुश्किल हालात में भी नई राह तलाश ली है। पनामा विल्ट बीमारी के कारण जब केले की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, तो किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया था।
लेकिन हार मानने के बजाय किसानों ने मत्स्य पालन (फिश फार्मिंग) को अपनाया। सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर आज ये किसान लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि शुरू में यह कदम जोखिम भरा लगा, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसका फायदा दिखने लगा। अब उनकी आर्थिक स्थिति में स्पष्ट सुधार आया है और वे दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उदाहरण बताता है कि कृषि में विविधता अपनाकर नुकसान की भरपाई की जा सकती है और नई संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
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