पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल सामने आते ही राज्य की सियासत की तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। इस बार के अनुमानों में मुकाबला मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सिमटता दिख रहा है, जबकि कांग्रेस पार्टी और वामपंथी दलों की स्थिति बेहद कमजोर आंकी जा रही है।
एग्जिट पोल के अनुसार, लंबे समय तक बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले कांग्रेस और वामपंथी दल अब हाशिए पर पहुंचते दिख रहे हैं। ज्यादातर सर्वे में कांग्रेस का खाता खुलना भी मुश्किल नजर आ रहा है। कुछ एजेंसियों ने कांग्रेस को 0 से 2 या अधिकतम 1 से 3 सीटों तक सीमित रखा है। वहीं लेफ्ट गठबंधन भी बेहद सीमित सीटों पर सिमटता दिखाई दे रहा है, जो इनके लगातार घटते जनाधार की ओर इशारा करता है।
अगर प्रमुख सर्वे एजेंसियों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर और भी दिलचस्प बनती है। चाणक्य के सर्वे में बीजेपी को 150 से 160 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि टीएमसी को 130 से 140 सीटें मिल सकती हैं। इस सर्वे में कांग्रेस को शून्य पर रखा गया है, जबकि अन्य दलों को 6 से 10 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
वहीं पी मार्क के सर्वे में भी लगभग यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। इसमें बीजेपी को 150 से 175 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि टीएमसी को 118 से 138 सीटों के बीच आंका गया है। कांग्रेस को यहां भी कोई खास बढ़त नहीं मिली है और उसे शून्य पर ही दिखाया गया है।
इन एग्जिट पोल के नतीजे यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब द्विध्रुवीय होती जा रही है, जहां मुकाबला मुख्य रूप से टीएमसी और बीजेपी के बीच ही सिमटता जा रहा है। कांग्रेस और वामपंथी दलों के लिए यह स्थिति भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि उन्हें अपने जनाधार को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।
हालांकि, यह सभी आंकड़े एग्जिट पोल पर आधारित हैं और वास्तविक नतीजे मतगणना के बाद ही सामने आएंगे। फिर भी मौजूदा रुझान राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत जरूर दे रहे हैं।
देश और राजनीति की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए – मिथिला हिन्दी न्यूज