दाखिल-खारिज मामलों में देरी खत्म करने की बड़ी पहल


पटना/राज्य ब्यूरो:
बिहार में दाखिल-खारिज (Mutation) मामलों में हो रही देरी को खत्म करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि अब “सक्षम न्यायालय” और “लंबित” शब्द की स्पष्ट परिभाषा तय कर दी गई है, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।


देरी की वजह क्या थी?

मंत्री ने बताया कि

  • बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) में
  • “सक्षम न्यायालय” और “लंबित” शब्दों की अलग-अलग व्याख्या की जा रही थी

👉 इसी कारण कई अंचलों (Circle Offices) में अधिकारी मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखते थे, जिससे आम लोगों को महीनों तक चक्कर लगाना पड़ता था।


 नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?

नई परिभाषा लागू होने के बाद:

  • दाखिल-खारिज मामलों का त्वरित निष्पादन (Fast Disposal) होगा
  • फाइलों को बेवजह लंबित रखने पर रोक लगेगी
  • पूरे राज्य में एक समान नियम लागू होगा
  • आम जनता को जल्द राहत मिलेगी

 आम लोगों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

दाखिल-खारिज एक बेहद जरूरी प्रक्रिया है, जिससे:

  • जमीन का कानूनी मालिकाना हक अपडेट होता है
  • जमीन खरीद-बिक्री के बाद रिकॉर्ड सही होता है
  • भविष्य में विवाद और धोखाधड़ी से बचाव होता है

👉 ऐसे में इस प्रक्रिया का तेज होना सीधे तौर पर लाखों लोगों को राहत देगा।


सरकार का लक्ष्य

सरकार का मुख्य उद्देश्य है:

  • प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना
  • जमीन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार और देरी को खत्म करना
  • डिजिटल और नियमबद्ध सिस्टम से विश्वास बढ़ाना

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