बिहार में बिजली चोरी पर प्रभावी रोक लगाने और बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने के लिए ऊर्जा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को अगले 10 वर्षों तक एनर्जी अकाउंटिंग (ऊर्जा लेखांकन) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत बिजली की आपूर्ति और उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत का मिलान किया जाएगा, जिससे बिजली चोरी और बिलिंग में होने वाली गड़बड़ियों का आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
ऊर्जा विभाग का मानना है कि स्मार्ट मीटर और एनर्जी अकाउंटिंग के संयुक्त उपयोग से बिजली व्यवस्था अधिक जवाबदेह और तकनीक आधारित बनेगी। इससे बिजली कंपनियों की आय में वृद्धि होगी, राजस्व नुकसान कम होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
वर्तमान में बिहार में लगभग 2.22 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से करीब 90 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। राज्य सरकार शेष उपभोक्ताओं तक भी स्मार्ट मीटर पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रही है।
नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियां बिजली वितरण कंपनियों को नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराएंगी। इन रिपोर्टों में यह जानकारी होगी कि किस क्षेत्र में राजस्व का नुकसान हो रहा है और उसके पीछे क्या कारण हैं। जिन इलाकों में बिजली चोरी की आशंका होगी, वहां विशेष जांच अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
ऊर्जा विभाग के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता के यहां बिजली की खपत अधिक पाई जाती है लेकिन बिल अपेक्षाकृत कम आता है, तो उसकी जांच की जाएगी। इसी प्रकार स्वीकृत विद्युत लोड और वास्तविक उपयोग में अंतर मिलने पर भी कार्रवाई संभव होगी। इससे अनधिकृत बिजली उपयोग और चोरी के मामलों की पहचान आसान हो जाएगी।
नई प्रणाली में वितरण ट्रांसफार्मरों से भेजी गई कुल बिजली और उपभोक्ताओं की बिलिंग के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। यदि दोनों के बीच बड़ा अंतर पाया जाता है, तो इसकी विस्तृत जांच होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली का नुकसान तकनीकी कारणों से हो रहा है या फिर चोरी के कारण।
ऊर्जा विभाग ने बताया कि राज्यभर के वितरण ट्रांसफार्मरों की निगरानी के लिए विशेष सिम आधारित उपकरण लगाए गए हैं। ये डिवाइस रियल टाइम में बिजली आपूर्ति का डेटा सर्वर तक भेजते हैं। इसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी क्षेत्र में कितनी बिजली भेजी गई और उपभोक्ताओं ने वास्तव में कितनी बिजली का उपयोग किया।
इस नई पहल से बिहार में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही बिजली चोरी पर अंकुश लगने से बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
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