इमरान मसूद ने गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड और आरोपी असद के एनकाउंटर को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस मामले पर विपक्ष की ओर से किसी प्रमुख नेता की यह पहली बड़ी प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि अपराधी को उसके धर्म या जाति से नहीं, बल्कि उसके अपराध से पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई अपराधी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कानून का नजरिया सभी के लिए समान होना चाहिए।
इमरान मसूद ने कहा, "एनकाउंटर में अपराधी ढेर होना चाहिए, लेकिन अपराधी की कोई जाति और धर्म नहीं होती। जब तक अपराधी को केवल अपराधी की नजर से नहीं देखा जाएगा, तब तक कानून-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।"
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में अपराधियों की पहचान को उनके नाम और धर्म से जोड़कर देखा जाता है, जिससे कानून के समान अनुप्रयोग पर सवाल उठते हैं। सांसद ने कहा कि आरोपी का नाम असद होने के कारण इस मामले को अलग तरीके से देखा जा रहा है।
अपने बयान के दौरान उन्होंने गाजीपुर की एक घटना का भी जिक्र किया, जहां कथित तौर पर रंगदारी नहीं देने पर एक व्यापारी के बेटे की हत्या कर दी गई थी। मसूद ने दावा किया कि उस मामले में अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं हुई, जबकि अन्य मामलों में त्वरित कार्रवाई देखने को मिलती है।
हालांकि, कानून-व्यवस्था और एनकाउंटर जैसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रियाओं के आधार पर तय होते हैं। ऐसे मामलों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रहती हैं।
इमरान मसूद के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है।
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