आज के दौर में स्कूल, कॉलेज, सरकारी फॉर्म, ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेजों के काम में फोटो कॉपी और प्रिंट आउट की जरूरत लगभग हर दिन पड़ती है। अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि जब दोनों में कागज ही निकलता है, तो फोटो कॉपी के सिर्फ 5 रुपये और प्रिंट आउट के 10 रुपये या उससे अधिक क्यों लिए जाते हैं।
दरअसल, दोनों सेवाओं की प्रक्रिया और खर्च अलग-अलग होते हैं। यही कारण है कि इनके दामों में अंतर देखने को मिलता है।
फोटो कॉपी में क्या होता है?
फोटो कॉपी मशीन पहले से मौजूद किसी दस्तावेज की हूबहू नकल तैयार करती है। इसमें मशीन सीधे कागज को स्कैन कर उसकी कॉपी निकाल देती है। इस प्रक्रिया में:
- कम समय लगता है
- कंप्यूटर की जरूरत नहीं पड़ती
- केवल मशीन, टोनर और बिजली का खर्च आता है
इसी वजह से फोटो कॉपी की लागत कम होती है और दुकानदार कम कीमत लेते हैं।
प्रिंट आउट क्यों होता है महंगा?
प्रिंट आउट निकालने की प्रक्रिया थोड़ी अलग और खर्चीली होती है। इसमें:
- कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल होता है
- फाइल खोलनी पड़ती है
- कई बार एडिटिंग या फॉर्मेटिंग करनी पड़ती है
- प्रिंटर की इंक और कार्ट्रिज का उपयोग होता है
प्रिंटर की इंक और कार्ट्रिज काफी महंगे आते हैं। इसके अलावा प्रिंटर का रखरखाव, बिजली और ऑपरेटर का समय भी खर्च होता है। यही कारण है कि प्रिंट आउट का शुल्क फोटो कॉपी की तुलना में अधिक रखा जाता है।
रंगीन प्रिंट का खर्च और ज्यादा
यदि कोई व्यक्ति कलर प्रिंट आउट करवाता है, तो उसका खर्च और बढ़ जाता है। कई दुकानों पर:
- ब्लैक एंड व्हाइट प्रिंट 5 से 10 रुपये
- कलर प्रिंट 20 से 50 रुपये तक लिया जाता है।
छोटे व्यवसाय का भी होता है खर्च
फोटो कॉपी और प्रिंटिंग की दुकान चलाने वालों को दुकान किराया, इंटरनेट, मशीन सर्विसिंग और कर्मचारियों का खर्च भी उठाना पड़ता है। ऐसे में वे अपनी लागत और मुनाफे को ध्यान में रखकर कीमत तय करते हैं।
फोटो कॉपी और प्रिंट आउट भले ही सामान्य व्यक्ति को एक जैसे लगें, लेकिन दोनों की तकनीक, मशीन और खर्च अलग-अलग होते हैं। इसी वजह से बाजार में इनके दामों में अंतर देखने को मिलता है।
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