पटना/सीतामढ़ी: बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तेजतर्रार महिला नेता और ‘मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित रितु जायसवाल ने अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। लंबे समय तक राजद का प्रमुख चेहरा रहीं रितु जायसवाल ने पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय के अटल सभागार में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।
रितु जायसवाल ने अपने इस फैसले की आधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी थी। भाजपा में शामिल होने के बाद पटना बीजेपी कार्यालय में समर्थकों और कार्यकर्ताओं की काफी हलचल देखी गई। राजनीतिक गलियारों में इसे राजद और विशेष रूप से तेजस्वी यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजद में उपेक्षा और टिकट कटने की नाराजगी को उनके इस फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से उनका टिकट काट दिया गया था। पार्टी ने उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को मौका दिया, जिसके बाद रितु जायसवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया। हालांकि जीत नहीं मिली, लेकिन उन्हें लगभग 64 हजार वोट प्राप्त हुए, जिससे यह संकेत मिला कि इलाके में उनका जनाधार मजबूत है।
भाजपा में शामिल होने के बाद रितु जायसवाल ने कहा कि जब उन्होंने परिहार से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब लोगों ने उन्हें “बागी” कहा था, लेकिन वास्तव में जनता बदलाव चाहती थी। उन्होंने दावा किया कि जनता का उन्हें व्यापक समर्थन मिला और करीब 65 हजार वोट उनके पक्ष में पड़े।
उन्होंने भाजपा में शामिल होने के फैसले पर कहा कि पार्टी राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और Narendra Modi के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। इसी सोच से प्रभावित होकर उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया।
रितु जायसवाल बिहार राजनीति का चर्चित चेहरा रही हैं। वे RJD महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसके अलावा 2021 से 2023 तक पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा गया था, जहां उन्हें लगभग 4.47 लाख वोट मिले थे, लेकिन वे चुनाव हार गई थीं।
इस बीच राजद एमएलसी फैसल अली ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रितु जायसवाल को राजद में समय से पहले काफी कुछ मिला था। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके भाजपा में जाने का असर आने वाले चुनावों में परिहार और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
पटना में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान सीतामढ़ी के कई प्रमुख भाजपा नेता नजर नहीं आए, जिससे स्थानीय राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
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