सीतामढ़ी। भगवान श्रीराम की नगरी Ayodhya और माता सीता की जन्मस्थली Sitamarhi को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित राम-जानकी मार्ग (फोरलेन कॉरिडोर) तेजी से आकार ले रहा है। लगभग 6,155 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना धार्मिक पर्यटन, क्षेत्रीय विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
परियोजना पूरी होने के बाद अयोध्या और सीतामढ़ी के बीच की दूरी कम होकर लगभग 369 किलोमीटर रह जाएगी। इससे श्रद्धालु और यात्री करीब 5 से 6 घंटे में दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच यात्रा कर सकेंगे।
राम-जानकी कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएं
- कुल लंबाई: लगभग 240 किलोमीटर फोरलेन मार्ग।
- मार्ग: अयोध्या से शुरू होकर उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा, सीवान, मशरख, शिवहर और सीतामढ़ी होते हुए नेपाल के Janakpur तक पहुंचेगा।
- आधुनिक सुविधाएं: यातायात को सुगम बनाने के लिए कई बाईपास, पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है।
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: यह मार्ग रामायण सर्किट को नई पहचान देगा और भारत-नेपाल धार्मिक पर्यटन को मजबूत करेगा।
पुनौराधाम के विकास को मिलेगी नई गति
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद केंद्र और बिहार सरकार की विशेष नजर अब सीतामढ़ी स्थित माता सीता की जन्मस्थली Punaura Dham पर है। पुनौराधाम को एक विश्वस्तरीय धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
यहां श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं, बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटन अवसंरचना और धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि राम-जानकी कॉरिडोर के पूर्ण होने के बाद सीतामढ़ी और पुनौराधाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
आर्थिक और सामाजिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से बिहार के कई जिलों में व्यापार, पर्यटन, होटल उद्योग और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी। यह कॉरिडोर केवल सड़क परियोजना नहीं बल्कि राम और सीता की पवित्र विरासत को जोड़ने वाला आस्था और विकास का सेतु साबित होगा।
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