प्रशांत किशोर ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पेट्रोल बचाओ अभियान और देश की आर्थिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ अपील और अभियान चलाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव जरूरी हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा, "प्रधानमंत्री ने आज से करीब 10 साल पहले स्वच्छता अभियान की बात की थी, लेकिन सवाल यह है कि कितनी सफाई हुई?" उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार के एक मंत्री हवाई जहाज से पहुंचे और उनके स्वागत के लिए पटना से गाड़ियों का बड़ा काफिला रवाना हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "यह पेट्रोल बचाओ है या पेट्रोल खपाओ?"
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रतीकात्मक प्रयासों का वास्तविक असर नहीं पड़ने वाला। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार के विकास दावों पर भी सवाल खड़े किए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, जैसा कि सरकार दावा करती है, तो फिर ऐसी स्थिति क्यों बन रही है कि अंतरराष्ट्रीय संकट या कुछ महीनों के युद्ध से पेट्रोल, तेल और खाद्य जैसी चीजों को लेकर चिंता पैदा हो जाए।
उन्होंने प्रधानमंत्री के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा, "अगर लोगों से कहा जा रहा है कि सोना मत खरीदिए, खर्च कम कीजिए, तो फिर सवाल उठता है कि यह कैसा विकास मॉडल है?"
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में यह भी कहा कि या तो पहले देश की तरक्की को लेकर किए गए दावे पूरी तरह सही नहीं थे, या फिर वर्तमान हालात पर दी जा रही चेतावनियों में विरोधाभास है।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है और आने वाले दिनों में इस पर सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।
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