बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। वर्ष 2010 में ओबरा विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पूर्व विधायक Som Prakash Singh को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनका निर्वाचन रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही विधायक पेंशन और पूर्व विधायक के तौर पर मिलने वाली सभी सुविधाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।
यह मामला उस समय का है जब सोम प्रकाश सिंह दारोगा पद पर रहते हुए चुनाव मैदान में उतरे थे। आरोप था कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था, ऐसे में उनका चुनाव लड़ना नियमों के खिलाफ माना गया। इस मामले को उनके प्रतिद्वंदी Pramod Singh Chandravanshi ने अदालत में चुनौती दी थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही उनका निर्वाचन रद्द कर दिया था, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर रोक मिली थी। लेकिन 28 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी, जिसके बाद मामला पूरी तरह साफ हो गया।
फैसले के बाद बिहार विधानसभा ने 15वीं विधानसभा की सदस्य सूची से सोम प्रकाश सिंह का नाम हटा दिया। साथ ही पेंशन और पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।
इस फैसले को बिहार की राजनीति और चुनावी नियमों के लिहाज से एक अहम मामला माना जा रहा है, क्योंकि यह सार्वजनिक पद और चुनावी पात्रता से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा संदेश देता है।
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