बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के अंग्रेजी बोलने के अंदाज को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री के कुछ वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें उनके अंग्रेजी शब्दों के उच्चारण को लेकर मीम्स बनाए गए और मजाक उड़ाया गया।
इस ट्रोलिंग के बाद Bharatiya Janata Party के कई वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेताओं ने इसे केवल एक व्यक्ति का मजाक नहीं, बल्कि भारतीय भाषाई और सामाजिक मानसिकता पर हमला बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी नेता की योग्यता का आकलन उसकी अंग्रेजी से नहीं, बल्कि उसके काम और जनसेवा से होना चाहिए।
बीजेपी के कई नेताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश में आज भी अंग्रेजी को श्रेष्ठता का प्रतीक मानने की मानसिकता बनी हुई है, जबकि लोकतंत्र में जनता से जुड़ाव और प्रशासनिक क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण है। समर्थकों ने यह भी कहा कि हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में सहजता से संवाद करने वाले नेताओं को निशाना बनाना गलत परंपरा को बढ़ावा देता है।
वहीं विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स का एक वर्ग इसे सामान्य राजनीतिक आलोचना और सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बता रहा है। हालांकि मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और इसे भाषा, वर्ग और सामाजिक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
सम्राट चौधरी फिलहाल इस विवाद पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके समर्थन में पार्टी नेताओं की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी इसे गंभीरता से ले रही है। बिहार की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
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