एक प्रचलित कहावत है— “पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं।” यानी भविष्य की दिशा वर्तमान के संकेतों से समझी जा सकती है। इसी कहावत के आईने में बिहार में सत्तारूढ़ Samrat Choudhary के शुरुआती कार्यकाल को देखा जा रहा है।
15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने एक महीने का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस दौरान लिए गए कई फैसले यह संकेत देते हैं कि सरकार प्रशासनिक सख्ती, सुशासन और विकास को प्राथमिकता देने के मूड में है।
सरकार गठन के बाद विधानसभा के विशेष सत्र में सम्राट चौधरी ने Narendra Modi, Amit Shah और Nitish Kumar सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया था। उन्होंने संकेत दिया था कि बिहार में सरकार का संचालन नीतीश मॉडल की कार्यशैली के अनुरूप आगे बढ़ेगा।
अब तक सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट की चार बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। इन बैठकों में लिए गए फैसले बताते हैं कि सरकार कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के मुद्दों पर समझौते के पक्ष में नहीं है।
सरकार की प्राथमिकताओं में शहरी विकास और महिला सुरक्षा भी प्रमुख रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से स्पष्ट कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को पुलिस कहीं भी छिपा हो, ढूंढ निकालेगी। वहीं डीएम और एसपी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कानून व्यवस्था के मामलों में परिणाम चाहिए, बहाने नहीं।
संदेश साफ है— नई सरकार प्रशासनिक जवाबदेही, सख्त कार्रवाई और तेज फैसलों के जरिए अपनी कार्यशैली की स्पष्ट पहचान बनाना चाहती है।
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