यूपी की राजनीति में फिर सक्रिय हुईं बिहार की क्षेत्रीय पार्टियां, क्या 2027 में बदल पाएंगी अपना रिकॉर्ड?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच एक बार फिर बिहार की क्षेत्रीय पार्टियों ने यूपी की राजनीति में सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे दल राज्य में अपनी राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश में अपना जनाधार मजबूत करना है। पिछले चुनावी आंकड़े बताते हैं कि बिहार में प्रभाव रखने वाली इन पार्टियों को यूपी में अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी कोई सीट जीतने में सफल नहीं रही। इसी तरह मुकेश सहनी की वीआईपी ने 55 सीटों पर चुनाव लड़ा था, मगर उसे भी सफलता नहीं मिली। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन उसका प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। इसके बावजूद ये दल मानते हैं कि पूर्वांचल और सीमावर्ती क्षेत्रों में बिहार मूल के मतदाताओं तथा कुछ जातीय समीकरणों के आधार पर वे अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ा सकते हैं। वहीं आलोचकों का तर्क है कि केवल जातीय समीकरणों के सहारे उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना आसान नहीं है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2027 का चुनाव यह तय करेगा कि बिहार की ये क्षेत्रीय पार्टियां यूपी में अपनी पहचान बना पाती हैं या फिर उनका प्रदर्शन पिछले चुनावों जैसा ही रहता है। फिलहाल इतना तय है कि चुनावी माहौल बनते ही छोटे और क्षेत्रीय दलों की सक्रियता बढ़ गई है और आने वाले महीनों में राजनीतिक समीकरणों में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। **राजनीति की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।**
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