मोबाइल बंद किया, सिम भी निकाला... फिर भी खाते से उड़ गए ₹2.44 लाख, साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला


भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोलार रोड निवासी 48 वर्षीय मार्केटिंग मैनेजर अंकित शिवहरे के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने ₹2.44 लाख उड़ा लिए। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित ने न तो किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था और न ही किसी को ओटीपी साझा किया था।

जानकारी के अनुसार, अंकित शिवहरे एक निजी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हैं और हाल ही में कार्यालय के काम से Neemuch गए हुए थे। बुधवार को अचानक उनका मोबाइल फोन अपने आप अपडेट होने लगा। फोन की स्क्रीन पर असामान्य गतिविधियां दिखाई देने पर उन्हें शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है।

संभावित खतरे को देखते हुए अंकित ने तुरंत मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिया और उसमें लगा सिम कार्ड भी निकाल लिया। उन्हें लगा कि इससे उनका बैंकिंग डेटा और निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी। लेकिन इसके बावजूद साइबर ठग उनके बैंक खाते तक पहुंचने में सफल रहे और अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹2.44 लाख निकाल लिए।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ठगों ने किसी तरह मोबाइल डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार फर्जी ऐप, मैलवेयर या स्पाइवेयर के जरिए मोबाइल का नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंच जाता है, जिससे वे बैंकिंग ऐप्स और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं।

मामले की शिकायत साइबर पुलिस से की गई है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि अपराधियों ने किस तकनीक का इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाली।

साइबर सुरक्षा के लिए सावधानियां

  • मोबाइल में केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।
  • किसी भी अनजान ऐप को स्क्रीन शेयरिंग या एक्सेसिबिलिटी परमिशन न दें।
  • बैंकिंग ऐप्स और मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखें।
  • खाते से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
  • मोबाइल में मजबूत पासवर्ड और बायोमेट्रिक सुरक्षा का उपयोग करें।

यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं और केवल ओटीपी साझा न करना ही सुरक्षा की गारंटी नहीं है। डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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