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5 हजार रुपये के लिए रुका डिस्चार्ज, पैसे लाने निकले मासूम को ट्रक ने कुचला; सीवान में दर्दनाक हादसे से उठे कई सवाल
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June 20, 2026
बिहार के सीवान जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने इंसानियत, स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क सुरक्षा तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुठनी थाना क्षेत्र के बभनौली गांव के समीप हुए सड़क हादसे में 12 वर्षीय एक मासूम की जान चली गई, जबकि उसका चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों का आरोप है कि एक निजी नर्सिंग होम द्वारा मात्र पांच हजार रुपये बकाया होने के कारण मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया गया, जिसके बाद पैसे की व्यवस्था करने निकले दोनों बच्चों के साथ यह हादसा हो गया।
मृतक प्रिंस कुमार के चाचा रामकिशुन राम के अनुसार, उनकी बेटी का इलाज मैरवा स्थित एक निजी नर्सिंग होम में चल रहा था। इलाज पूरा होने के बाद परिवार उसे घर ले जाना चाहता था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने पांच हजार रुपये बकाया बताते हुए डिस्चार्ज देने से मना कर दिया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार ने बाद में भुगतान करने की बात कही, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
परिजनों का कहना है कि मजबूरी में परिवार के दो नाबालिग बच्चों को पैसे लाने के लिए भगवानपुर गांव भेजा गया। दोनों बच्चे बाइक से जा रहे थे कि बभनौली गांव के पास एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया।
स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को तुरंत मैरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने 12 वर्षीय प्रिंस कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि 12 वर्षीय मुन्ना कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है।
इस घटना की सबसे मार्मिक बात यह है कि जिस बहन को अस्पताल से घर लाने की तैयारी चल रही थी, वह अस्पताल में अपने परिवार का इंतजार कर रही थी, जबकि उसका भाई रास्ते में मौत का शिकार हो गया। एक ही परिवार पर दुख का ऐसा पहाड़ टूटा है जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
हालांकि नर्सिंग होम प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या वास्तव में बकाया राशि के कारण मरीज को रोका गया था और यदि ऐसा हुआ तो क्या मानवीय आधार पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी।
यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों की भी कहानी है जहां आर्थिक मजबूरी कभी-कभी लोगों को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देती है, जिनकी कीमत जिंदगी से चुकानी पड़ती है। अब जरूरत है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करे और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराए।
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