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अब 9वीं कक्षा से पढ़ाया जाएगा आपातकाल का इतिहास, NCERT की नई किताब में बड़ा बदलाव
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June 24, 2026
नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित और विवादित दौरों में से एक माने जाने वाले वर्ष 1975 के आपातकाल (इमरजेंसी) को अब स्कूल स्तर पर पहले से अधिक विस्तार से पढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नौवीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को प्रमुख स्थान दिया है। अब तक यह विषय मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं कक्षा के राजनीतिक विज्ञान पाठ्यक्रम का हिस्सा था।
नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर आधारित अध्याय में आपातकाल का उल्लेख किया गया है। छात्रों को बताया जाएगा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो लगभग 21 महीने तक प्रभावी रहा। पुस्तक में इस दौरान मौलिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों, राजनीतिक परिस्थितियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव की जानकारी भी दी गई है।
पाठ्यपुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन का भी जिक्र किया गया है। साथ ही लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और उसकी जिम्मेदारियों को भी विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है। छात्रों को यह बताया जाएगा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया को चौथे स्तंभ के रूप में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के अनुरूप तैयार की गई इस नई पुस्तक में भारतीय इतिहास, संस्कृति और सभ्यता को अधिक महत्व दिया गया है। इसके तहत भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
नई किताब में हड़प्पा, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन की प्राचीन सभ्यताओं का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। छात्र इन सभ्यताओं के कालक्रम, भौगोलिक विस्तार, सामाजिक संगठन, सिंचाई व्यवस्था और निर्माण कार्यों के बारे में जान सकेंगे। वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा को समझाने के लिए पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—की अवधारणा को भी शामिल किया गया है, जिससे छात्रों को प्रकृति और मानव जीवन के संबंधों को समझने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही पुस्तक में ‘लैंडस्लाइड’ नामक एक नया पाठ भी जोड़ा गया है, जिसमें भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण, प्रभाव और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य छात्रों को आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना है।
हालांकि नई पाठ्यपुस्तक में कई पारंपरिक अध्यायों को हटाया भी गया है। फ्रांसीसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति, नाजीवाद और हिटलर का उदय तथा उपनिवेशवाद जैसे विषय अब इस कक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे। इन बदलावों को लेकर शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई पाठ्यपुस्तक छात्रों को केवल ऐतिहासिक तथ्यों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि लोकतंत्र, समाज, भूगोल और भारतीय संस्कृति को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने का अवसर भी प्रदान करेगी।
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