मुजफ्फरपुर में जमीन खरीदना होगा महंगा, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में बढ़ेगा एमवीआर

मुजफ्फरपुर: जिले के नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन खरीदने-बेचने वालों के लिए बड़ी खबर है। लंबे समय से लंबित भूमि वर्गीकरण की प्रक्रिया अब तेज हो गई है, जिसके बाद इन क्षेत्रों में जमीन का न्यूनतम मूल्यांकन रजिस्टर (एमवीआर) बढ़ने की संभावना है। इससे जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन पर खर्च भी बढ़ जाएगा। जिला प्रशासन ने नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों के पेरिफेरल (परिधीय) इलाकों की जमीन का नए सिरे से वर्गीकरण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला पदाधिकारी ने संबंधित अंचलाधिकारियों को इन क्षेत्रों के सभी मौजों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके आधार पर जमीन का नया एमवीआर तय किया जाएगा। अब तक जिले के कई नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में शहरी मानकों के अनुरूप भूमि का वर्गीकरण नहीं हो सका था। इसके कारण यहां जमीन का निबंधन अपेक्षाकृत कम दरों पर हो रहा था। लेकिन नए वर्गीकरण के बाद इन इलाकों की जमीन का मूल्यांकन बढ़ेगा, जिससे रजिस्ट्री के दौरान देय स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क भी अधिक देना पड़ सकता है। उत्पाद, मद्य निषेध एवं निबंधन विभाग ने पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सात तथा शहरी और पेरिफेरल क्षेत्रों के लिए छह श्रेणियों में भूमि वर्गीकरण कर एमवीआर निर्धारित करने का निर्देश जारी किया था। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र तथा राष्ट्रीय एवं मुख्य सड़कों के दोनों ओर की भूमि को अलग श्रेणी में शामिल किया गया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में भी औद्योगिक क्षेत्र को नई श्रेणी के रूप में जोड़ा गया है। नगर निगम क्षेत्रों में तो यह वर्गीकरण पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन कांटी, मोतीपुर और साहेबगंज नगर परिषद के अलावा बरूराज, सरैया, तुर्की-कुढ़नी, माधोपुर सुस्ता, सकरा, मुरौल और मीनापुर नगर पंचायतों में यह प्रक्रिया अधूरी थी। अब इन क्षेत्रों में भी सड़क और उपयोगिता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार नगर परिषद की सीमा से चार किलोमीटर और नगर पंचायत की सीमा से दो किलोमीटर तक के क्षेत्रों को पेरिफेरल क्षेत्र माना जाएगा। इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजे भी इस श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों की जमीन का सरकारी मूल्यांकन बढ़ेगा और बाजार कीमतों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। जिला प्रशासन ने संबंधित नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को अधिसूचित सड़कों की सूची जिला निबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद सड़कों की स्थिति और उपयोग के आधार पर भूमि का अंतिम वर्गीकरण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से सरकार को राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं जमीन खरीदने वाले लोगों को भविष्य में अधिक स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। इसलिए जिन लोगों की जमीन खरीदने या बेचने की योजना है, उनके लिए यह महत्वपूर्ण खबर साबित हो सकती है। बिहार और मिथिला की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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