टीएमसी को बड़ा झटका: राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और सांसद पद से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और अपनी उपेक्षा को इस्तीफे का प्रमुख कारण बताया है। रॉय ने राज्यसभा के सभापति एवं सी. पी. राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें पार्टी में अलग-थलग कर दिया गया था। बंगाल में भ्रष्टाचार की जांच की मांग शुखेंदु शेखर रॉय ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल के विभिन्न नगर निकायों और कस्बों में हुए कथित भ्रष्टाचार की फॉरेंसिक ऑडिट कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि जनता के बीच भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक नाराजगी है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। आरजी कर मामले का भी किया जिक्र रॉय ने कहा कि बंगाल में जनता की नाराजगी केवल आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं थी। उनके अनुसार कई अन्य मुद्दों को लेकर भी लोगों के मन में गुस्सा था, जो आरजी कर प्रकरण के बाद खुलकर सामने आया। INDIA गठबंधन के भविष्य पर भी उठाए सवाल टीएमसी से इस्तीफा देने के बाद रॉय ने विपक्षी INDIA गठबंधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस गठबंधन का भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखाई देता और वर्तमान परिस्थितियों में इसके सफल होने की संभावना कम है। ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक चुनौती रॉय का इस्तीफा ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे रॉय लंबे समय से संगठन और संसद में टीएमसी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनका इस्तीफा पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है। देश और राजनीति की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज
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