शहाबुद्दीन से लेकर तेजस्वी तक पर बोले साधु यादव, कहा- जनता के बीच जाएंगे तभी मिलेगी राजनीतिक सफलता

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े साले और पूर्व सांसद साधु यादव ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कई राजनीतिक और व्यक्तिगत मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। बातचीत के दौरान उन्होंने दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव, अपने छोटे भाई सुभाष यादव और लालू यादव को लेकर बेबाक टिप्पणियां कीं। साधु यादव ने दिवंगत राजद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी वजह से यादव समाज और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि शहाबुद्दीन के पास उनके सामने खड़े होने की भी हिम्मत नहीं थी। साधु यादव का कहना था कि कुछ व्यक्तियों के कारण पूरे समाज और राजनीतिक संगठन को गलत नजरिए से देखा जाने लगा, जिसका असर पार्टी की छवि पर भी पड़ा। तेजस्वी यादव के नेतृत्व और राजनीतिक भविष्य पर बोलते हुए साधु यादव ने उन्हें जनता के बीच ज्यादा समय बिताने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव को सत्ता में वापसी करनी है तो उन्हें प्रतिदिन हजारों लोगों से मिलना होगा, उनकी समस्याएं सुननी होंगी और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद बनाए रखना होगा। उनके अनुसार, जनता से जुड़ाव ही किसी भी नेता की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने तेजस्वी यादव को यह भी सलाह दी कि वे गलत लोगों की संगत से बचें और सीधे आम जनता तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहें। साधु यादव ने कहा कि जब कोई नेता जनता के बीच रहता है, तभी उसे वास्तविक समस्याओं और लोगों की जरूरतों की सही जानकारी मिलती है। बातचीत के दौरान साधु यादव ने पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज भी पप्पू यादव उनसे मिलने उनके घर आते हैं और पुराने संबंधों को सम्मानपूर्वक निभाते हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत रिश्तों की मजबूती का उदाहरण बताया। अपने छोटे भाई सुभाष यादव पर टिप्पणी करते हुए साधु यादव ने कहा कि उन्होंने राजद को मजबूत बनाने के लिए काफी मेहनत की थी, लेकिन कुछ गतिविधियों के कारण उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि कई बार गलत काम कोई और करता था, लेकिन बदनामी उनके हिस्से में आ जाती थी। इंटरव्यू के दौरान साधु यादव ने अपने नाम से जुड़ा एक रोचक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके जन्म के समय घर पर साधु-संतों का लगातार आना-जाना था। जन्म के बाद कुछ साधुओं ने उन्हें देखकर कहा था कि यह बच्चा साधु है। इसके बाद परिवार और गांव के लोगों ने उन्हें साधु नाम से पुकारना शुरू कर दिया और यही नाम उनकी पहचान बन गया। करीब एक घंटे लंबे पॉडकास्ट में साधु यादव का रुख लालू प्रसाद यादव को लेकर अपेक्षाकृत नरम दिखाई दिया। उन्होंने लालू यादव के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन और सामाजिक न्याय की राजनीति में उनके योगदान का उल्लेख किया। साधु यादव ने बताया कि आपातकाल के दौरान लालू यादव लंबे समय तक उनके ससुराल में रहे थे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय में कई बड़े नेताओं ने लालू यादव को सामाजिक न्याय की राजनीति का प्रमुख चेहरा माना है। इस इंटरव्यू के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर साधु यादव के बयानों की चर्चा तेज हो गई है। खासकर तेजस्वी यादव को दी गई सलाह और शहाबुद्दीन को लेकर की गई टिप्पणियां राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बनी हुई हैं। राजनीति की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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