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झोपड़ी से बिहार टॉपर बनी ममता: गरीबी को हराकर पैरामेडिकल परीक्षा में हासिल किया पहला स्थान
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يونيو 13, 2026
गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड स्थित गोइनिया गांव की रहने वाली ममता कुमारी ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर एक ऐसी सफलता हासिल की है, जिसकी चर्चा पूरे बिहार में हो रही है। बेहद गरीब महादलित परिवार से आने वाली ममता ने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग में पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जबकि सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में भी आठवां स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
ममता भुइयां-मुसहर समाज से संबंध रखती हैं और उनके पिता सुरेंद्र मांझी सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक अभाव, संसाधनों की कमी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ममता ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की। आज उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों के सामने गरीबी भी हार मान लेती है।
ममता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने वीडियो कॉल कर उन्हें बधाई दी। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके प्रति समर्पण हो, तो कोई भी कठिनाई सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने ममता के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया।
ममता की सफलता के पीछे उनके शिक्षक चंदन कुमार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बताया जाता है कि चंदन कुमार पिछले आठ वर्षों से उन्हें नि:शुल्क शिक्षा दे रहे थे। उनके मार्गदर्शन और ममता की अथक मेहनत का ही परिणाम है कि आज वह बिहार की टॉपर बनी हैं। सफलता की खबर मिलने के बाद सांसद प्रतिनिधि नंदलाल मांझी भी उनके गांव पहुंचे और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं तथा आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया।
ममता कुमारी की कहानी आज उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। ममता ने साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।
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