👁️ अब तक पढ़ा गया:
बार
हाजीपुर में पत्रकार के घर शराबबंदी कानून के तहत छापेमारी पर सियासी घमासान, राजद ने सरकार पर साधा निशाना
0
June 18, 2026
वैशाली जिले के हाजीपुर में एक पत्रकार के घर शराबबंदी कानून के तहत हुई छापेमारी को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मामले को लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी से जोड़ते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जानकारी के अनुसार हाजीपुर के राजेंद्र चौक स्थित एक किराए के मकान में रहने वाले पत्रकार मनीष कुमार सिंह के घर मंगलवार देर रात उत्पाद विभाग और नगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। बताया जाता है कि रात करीब 10 बजे पांच वाहनों में पहुंचे अधिकारियों ने घर की गहन तलाशी ली। इस दौरान पत्रकार का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट भी कराया गया, जिसमें अल्कोहल की मात्रा शून्य पाई गई।
छापेमारी के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। राजद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करने वाले पत्रकारों को दबाने और डराने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने वैशाली डीएम कार्यालय में कथित रसोइया बहाली घोटाले की खबरों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उसी का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।
राजद ने अपने पोस्ट में लिखा कि बिहार में अफसरशाही अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई है और जो लोग भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितताओं को उजागर करते हैं, उन्हें विभिन्न तरीकों से परेशान किया जाता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि शराब सेवन के आरोप में पत्रकार को गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया, लेकिन जांच में आरोप गलत साबित हो गया।
इधर पत्रकार मनीष कुमार सिंह ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने लगातार प्रशासनिक गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को सामने लाने का काम किया है, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में कोई भी सदस्य नशा नहीं करता है और जांच के दौरान भी कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। इसके बावजूद देर रात घर में तलाशी लेकर उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पत्रकार के अनुसार जब छापेमारी हुई, उस समय उनकी पत्नी और बच्चे घर में मौजूद थे तथा परिवार के अधिकांश सदस्य सो रहे थे। अचानक बड़ी संख्या में पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों के पहुंचने से परिवार के लोग घबरा गए। उनका आरोप है कि पूरी कार्रवाई ने परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया।
इस घटना के बाद विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। राजद नेताओं का कहना है कि यदि कार्रवाई किसी गलत सूचना के आधार पर की गई थी तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया है।
दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छापेमारी किस सूचना के आधार पर की गई थी और कार्रवाई के पीछे क्या कारण थे। फिलहाल यह मामला केवल शराबबंदी कानून के तहत की गई एक छापेमारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े बड़े सवालों को जन्म दे रहा है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया और संभावित जांच पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बना रह सकता है।
**राज्य और देश की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए — मिथिला हिन्दी न्यूज।**
