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आनंद मोहन का जेडीयू नेतृत्व पर बड़ा हमला, बोले- 'कुछ चिरकुट नेताओं ने नीतीश कुमार को दरबारी बना दिया'
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June 07, 2026
मुजफ्फरपुर। बिहार की राजनीति में एक बार फिर पूर्व सांसद आनंद मोहन के बयान ने हलचल मचा दी है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए जेडीयू के कुछ बड़े नेताओं पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सत्ता और संगठन में कमजोर करने की कोशिश की गई है।
रविवार को मुजफ्फरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि चुनाव के समय नारा दिया गया था, "25 से 30, फिर से नीतीश"। लेकिन चुनाव जीतने के बाद ऐसी क्या परिस्थितियां बन गईं कि उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि लोग यह भी कहते हैं कि उनसे गन प्वाइंट पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा लिया गया था।
उन्होंने आगे कहा कि जो नेता मुख्यमंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री आवास से जनता दरबार लगाते थे, आज कुछ "चिरकुट नेताओं" ने उन्हें दरबारी बनाकर रख दिया है। उनका आरोप था कि हर सुबह मुख्यमंत्री को किसी न किसी नेता के यहां पहुंचा दिया जाता है और चाटुकारों तथा बेईमान लोगों ने उनके विकास कार्यों पर पानी फेर दिया है।
"आज चुनाव हो जाए तो एनडीए चारों खाने चित हो जाएगा"
आनंद मोहन ने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियों में एनडीए कमजोर हो चुका है। उन्होंने कहा कि यदि आज चुनाव हो जाए तो गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि उन्हें डराया या चुप नहीं कराया जा सकता और यदि उन्हें छेड़ा गया तो बिहार में नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है।
बेटे को मंत्री नहीं बनाने की चर्चा पर दी सफाई
हाल के दिनों में राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही है कि उनके बेटे चेतन आनंद को मंत्री नहीं बनाए जाने के कारण वे नाराज हैं। इस पर सफाई देते हुए आनंद मोहन ने कहा कि उनकी नाराजगी का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार से काफी पहले से वह इस मुद्दे को उठा रहे हैं और उनका उद्देश्य केवल नीतीश कुमार के सम्मान और राजनीतिक स्थिति को लेकर चिंता जताना है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
गौरतलब है कि आनंद मोहन लंबे समय से नीतीश कुमार के करीबी माने जाते रहे हैं। उनकी पत्नी लवली आनंद जदयू की सांसद हैं, जबकि उनके पुत्र चेतन आनंद जदयू विधायक हैं। इसके बावजूद हाल के महीनों में उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ लगातार सार्वजनिक बयान दिए हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि जदयू नेतृत्व आनंद मोहन के इन बयानों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और इसका आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
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