बंगाल की लाइब्रेरियों से हटेंगी 'एपांग ओपांग झपांग' जैसी किताबें? मंत्री के बयान से मचा सियासी बवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक पुस्तकालयों में रखी जाने वाली पुस्तकों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के पुस्तकालय मंत्री Gourishankar Ghosh ने कहा है कि सरकारी सहायता प्राप्त लाइब्रेरियों में केवल ऐसी किताबों को स्थान दिया जाएगा, जो पाठकों के ज्ञानवर्धन और राष्ट्रीय चेतना के विकास में सहायक हों। मंत्री के इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की कुछ रचनाओं और कविताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर उनकी चर्चित कविता 'एपांग ओपांग झपांग' का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। गौरीशंकर घोष ने कहा कि लोग पुस्तकालयों में ज्ञान प्राप्त करने और अपने बौद्धिक विकास के लिए जाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि लाइब्रेरियों में ऐसी पुस्तकें उपलब्ध हों, जो पाठकों, विशेषकर बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि ऐसी किताबें, जिनसे ज्ञानवर्धन नहीं होता, उन्हें पुस्तकालयों में रखने का कोई औचित्य नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुस्तकालयों में उन पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो समाज, इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर आधारित हों। उन्होंने कहा कि भविष्य में लाइब्रेरियों में Rabindranath Tagore, Kazi Nazrul Islam और Swami Vivekananda की रचनाओं के साथ-साथ Chhatrapati Shivaji Maharaj और Maharana Pratap जैसी ऐतिहासिक विभूतियों की जीवनियों को अधिक महत्व दिया जाएगा। हालांकि, मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह फैसला साहित्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है, जबकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल पुस्तकालयों की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाना है। फिलहाल इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। देश और राजनीति की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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