SVU की छापेमारी के बीच IAS अधिकारियों की पोस्टिंग पर उठे सवाल, रिशु श्री कनेक्शन बना चर्चा का विषय

बिहार में कथित टेंडर घोटाले और सरकारी दलाल रिशु श्री से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह बिहार पुलिस की स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने दो आईएएस अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा से जुड़े परिसरों पर की गई। दोनों अधिकारियों पर रिशु श्री से लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। इस कार्रवाई से एक दिन पहले बिहार सरकार ने बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों का तबादला किया था। तबादला सूची में कुछ ऐसे अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं या बरकरार रखा गया, जिनका नाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच रिपोर्ट में सामने आया था। इसी वजह से प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। ईडी की जांच रिपोर्ट में आईएएस अधिकारी आनंद किशोर का नाम प्रमुखता से सामने आया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नगर विकास विभाग में टेंडर प्रक्रिया के दौरान रिशु श्री का प्रभाव था और विभागीय स्तर पर उसे सहयोग मिलने के आरोप जांच में सामने आए थे। रिपोर्ट के अनुसार रिशु श्री के मोबाइल फोन से नगर विकास विभाग और बिहार मास्टर प्लान से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। हालिया प्रशासनिक फेरबदल में आनंद किशोर को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष पद से हटाया गया, लेकिन उन्हें वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाए रखा गया है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ईडी की रिपोर्ट में आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र कुमार का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में उनके संबंध में कुछ लाभ प्राप्त करने के आरोपों का जिक्र किया गया था। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें बिहार राज्य पुल निर्माण निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह निगम राज्य में बड़े पुलों और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के निर्माण का जिम्मा संभालता है और हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं का संचालन करता है। SVU की छापेमारी और तबादलों के बाद विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब मांगा है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल में जुटी हुई हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले पर बिहार की राजनीति, प्रशासन और आम लोगों की नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। राजनीति और बिहार की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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