TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! दिल्ली पहुंचीं ममता बनर्जी, पार्टी के भीतर बगावत की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों ने नया राजनीतिक माहौल बना दिया है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के अंदर मतभेद और नाराजगी की चर्चाएं अब दिल्ली तक पहुंच गई हैं। इसी बीच टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बार ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे का माहौल पहले के मुकाबले काफी अलग नजर आया। आमतौर पर उनके दिल्ली पहुंचने पर पार्टी सांसदों और कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी देखने को मिलती थी, लेकिन इस बार सीमित नेताओं की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। बताया जा रहा है कि दिल्ली में उनके आवास पर मुख्य रूप से अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ही मौजूद रहे। नाराज सांसदों की बैठकों की चर्चा मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ नाराज सांसदों ने दिल्ली में अलग-अलग बैठकें की हैं। हालांकि इन बैठकों और कथित रणनीतियों को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक हलकों में इन घटनाक्रमों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सुखेंदु शेखर रॉय के बयान से बढ़ी चर्चा टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के एक बयान ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने संकेतपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी संकट को बढ़ने से पहले संभालना जरूरी होता है। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही हलचलों से जोड़कर देखा जा रहा है। कोलकाता में भी संगठनात्मक चुनौतियां रिपोर्टों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बुलाई गई एक बैठक में कुछ पार्षदों की अनुपस्थिति और असहमति की खबरें भी सामने आई हैं। इससे विपक्ष को टीएमसी पर निशाना साधने का मौका मिला है। भाजपा ने साधा निशाना इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा भी नजर बनाए हुए है। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने टीएमसी की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम और दिलचस्प हो सकते हैं। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से पार्टी में किसी बड़े संकट की बात स्वीकार नहीं की गई है। वहीं पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन मजबूत है और विरोधियों द्वारा स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के मानसून सत्र और पश्चिम बंगाल की राजनीति में होने वाले घटनाक्रम यह स्पष्ट करेंगे कि ये चर्चाएं केवल राजनीतिक अटकलें हैं या फिर पार्टी के भीतर वास्तव में कोई बड़ा बदलाव आकार ले रहा है। देश और राजनीति की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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