ट्रक ड्राइवर की बेटी कायनात ने रचा इतिहास, 13 घंटे की पढ़ाई से पास की NEET, अब बनेगी डॉक्टर

दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली कायनात खानम ने कठिन परिस्थितियों और आर्थिक संघर्ष के बावजूद नीट (NEET) परीक्षा पास कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को साकार कर दिखाया है। बिरौल प्रखंड के मोरवारा गांव की रहने वाली कायनात की सफलता आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है। ट्रक ड्राइवर पिता की सीमित आय और गांव की मुश्किल परिस्थितियों के बीच उन्होंने लगातार मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। कायनात बताती हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब लगातार असफलता मिलने के कारण उनका आत्मविश्वास टूट गया था। परिवार ने पढ़ाई छोड़ने तक की सलाह दे दी थी। लेकिन उनके कोचिंग शिक्षक सुमित सर ने उनका हौसला बढ़ाया और कहा, "तुम कर सकती हो, एक बार और कोशिश करो।" शिक्षक के प्रोत्साहन पर उन्होंने संस्थान के हॉस्टल में रहकर दोबारा तैयारी शुरू की और आखिरकार सफलता हासिल कर ली। उन्होंने बताया कि री-नीट की तैयारी के दौरान कोचिंग में बेहद कठिन टेस्ट लिए जाते थे। कम अंक आने पर कई बार वह रो भी पड़ती थीं, लेकिन इसी ने उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। कायनात रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। रात करीब 2 बजे सोतीं और सुबह 10 बजे उठकर पूरे दिन पढ़ाई में जुट जाती थीं। उनकी यही मेहनत आज रंग लाई है। कायनात की शुरुआती पढ़ाई पश्चिम बंगाल में अपने नाना-नानी के घर रहकर हुई थी। कोविड-19 महामारी के दौरान वह अपने गांव मोरवारा लौट आईं। गांव में इंटरनेट नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित होने लगी। बेटी की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए उनके पिता इम्तियाज अहमद खान ने दरभंगा के रहमगंज में किराये का मकान लेकर पूरे परिवार को शहर में बसाया। कायनात का मानना है कि ऑनलाइन की तुलना में ऑफलाइन पढ़ाई अधिक प्रभावी होती है, क्योंकि इसमें शिक्षकों से सीधे मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने बताया कि घर से तैयारी के दौरान दो वर्षों तक सफलता नहीं मिली, लेकिन कोचिंग संस्थान से जुड़ने के बाद उनकी तैयारी में बड़ा बदलाव आया। कायनात के पिता इम्तियाज अहमद खान, जो पेशे से ट्रक चालक हैं, ने कहा कि सीमित आय में किराया, परिवार का खर्च और बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने बेटी का सपना पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आज उनकी मेहनत सफल हो गई है और उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करेगी। कायनात खानम की सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इरादे, कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन मिलने पर आर्थिक अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। — मिथिला हिंदी न्यूज़ रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू
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